भासा महासम्मेलन में चिकित्सकों ने उठाई सुरक्षा, प्रोन्नति और स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार की मांग

द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 17 मई : राज्य के चिकित्सकों में व्याप्त असंतोष, कार्यस्थल पर असुरक्षा, प्रशासनिक उपेक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों को लेकर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की सभा सह महासम्मेलन शनिवार को आईएमए हॉल में आयोजित किया गया। चिकित्सकों ने हॉल से जेपी गोलंबर, मौर्य होटल तक पैदल मार्च निकाला।
सभा में विभिन्न जिलों से आए चिकित्सकों एवं संघ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से 19 सूत्री प्रस्ताव पारित कर बिहार सरकार से चिकित्सकों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आग्रह किया गया।
महासम्मेलन में कहा गया कि निजी प्रैक्टिस बंदी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार चिकित्सक संघ से समुचित वार्ता करे। साथ ही राज्य के सेवा चिकित्सकों के लिए समुचित आवास, सुरक्षा एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों को वाहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई।
चिकित्सकों ने “बिहार चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून 2011 एवं संशोधित 2014” को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग करते हुए अस्पतालों में तोड़फोड़ एवं चिकित्सकों पर हिंसा करने वालों के लिए न्यूनतम 10 वर्ष के सश्रम कारावास का प्रावधान करने की अपील की। इसके साथ ही अस्पतालों में सशस्त्र सुरक्षा गार्डों की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
सभा में स्वास्थ्य निदेशालय के पुनर्गठन, लंबित नियमित प्रोन्नति एवं DACP अधिसूचना शीघ्र जारी करने, संविदा अवधि को प्रोन्नति में जोड़ने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को विशेष भत्ता देने जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।
चिकित्सकों ने कहा कि NEET PG में सेवा पूर्ण कर चुके चिकित्सकों के लिए Degree की 50 प्रतिशत सीटें एवं Diploma की सभी सीटें आरक्षित की जाएं ताकि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर हो सके। साथ ही सेवाकालीन एवं सेवानिवृत्त चिकित्सकों और उनके परिवारों के लिए 50 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई।
महासम्मेलन में उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, चिकित्सकों का मनोबल बनाए रखने तथा आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह जानकारी भासा बिहार के प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार ने दी।

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