फर्जी डिग्री पर FIR, फिर भी बड़े अस्पतालों में पोस्टिंग! स्वास्थ्य विभाग के तबादला आदेश पर उठे बड़े सवाल

हेमंत मोहन

पटना, 9 मई | बिहार स्वास्थ्य विभाग का हालिया तबादला आदेश अब सवालों के घेरे में आ गया है। विभाग द्वारा जारी आदेश संख्या-284 (6बी.) और 285 (6बी.) के तहत 1220 जीएनएम कर्मियों का तबादला किया गया है। यह आदेश 26 मार्च 2026 को जारी हुआ था और इसे 1 जून 2026 से लागू किया जाना है। लेकिन इस सूची में उन कर्मियों के नाम सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है, जिन पर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने का आरोप है और जिनके खिलाफ पहले से प्राथमिकी भी दर्ज है।

जानकारी के अनुसार मुंगेर जिले में फर्जी डिग्री मामले की जांच के दौरान करीब 20 जीएनएम कर्मियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद जनवरी 2025 में कई कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। बावजूद इसके, अब उन्हीं में शामिल कुछ कर्मियों को बिहार के बड़े अस्पतालों में नई पोस्टिंग दे दी गई है।

स्थानांतरण सूची के अनुसार सरिता कुमारी को पीएमसीएच पटना, सरवेज आलम को सदर अस्पताल हाजीपुर और संगीता कुमारी को अनुमंडलीय अस्पताल शेरघाटी, गया में पदस्थापित किया गया है। ये तीनों पहले मुंगेर के धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत थे और इन पर फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति लेने का आरोप है।

बताया जा रहा है कि बिहार परिचारिका निबंधन परिषद द्वारा की गई जांच में मुंगेर जिले के कई जीएनएम कर्मियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. पी.एम. सहाय ने 2024 में प्रमाणपत्रों की जांच कराई थी, जिसमें 2020 से 2022 के बीच नियुक्त कई कर्मियों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसके बाद धरहरा सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अविनाश कुमार ने 24 जनवरी 2025 को थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

इस मामले पर डॉ. अविनाश कुमार ने कहा कि मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में इन कर्मियों का तबादला कैसे किया गया, इसका जवाब विभाग ही दे सकता है।

इधर सूत्रों के अनुसार पीएमसीएच पटना में मोतिहारी और सीवान से भी दो उम्मीदवार ज्वाइनिंग देने पहुंचे थे, जिन्होंने बताया कि उनका मामला भी कोर्ट में चल रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मामले की जांच चल रही है और कोर्ट में सुनवाई जारी है, तब ऐसे कर्मियों को बड़े अस्पतालों में पोस्टिंग कैसे दी गई। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर विभाग की अगली कार्रवाई और हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है।

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