द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 19 मई : बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में कक्षा-1 में नामांकन लेने वाले बच्चों के लिए नई पहल शुरू की है। अब छोटे बच्चों को प्ले-वे स्कूल की तर्ज पर खेल-कूद और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इस योजना का लाभ राज्य के करीब 40 हजार सरकारी स्कूलों में नामांकन लेने वाले लगभग 5 लाख नए छात्रों को मिलेगा।
यह विशेष कार्यक्रम तीन महीने तक चलेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल के माहौल के अनुरूप ढालना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है। विभागीय जानकारी के अनुसार कक्षा-1 में नामांकन लेने वाले करीब 40 प्रतिशत बच्चे कुछ दिनों बाद स्कूल आना छोड़ देते हैं। अभिभावकों का कहना होता है कि बच्चे स्कूल आने में रुचि नहीं दिखाते।
इस संबंध में मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शिक्षा विभाग बच्चों को स्कूल से जोड़ने और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है।
खेल-खेल में होगी पढ़ाई
विशेष कार्यक्रम के तहत बच्चों को स्कूल, कक्षा, शिक्षक, विषय, शब्द और अंकों से परिचित कराया जाएगा। खेल-खेल में हिंदी, अंग्रेजी और गणित की शुरुआती जानकारी दी जाएगी। बच्चों में साझा करने की आदत, संवाद कौशल और समूह में घुलने-मिलने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
इसके अलावा बच्चों को सही ढंग से बैठना, पेंसिल पकड़ना, शारीरिक गतिविधियां करना और स्वास्थ्य-पोषण से जुड़ी आदतें भी सिखाई जाएंगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे बच्चों की सोचने, समझने और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी।
शिक्षकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से प्रखंड संसाधन केंद्रों के माध्यम से कक्षा-1 के लिए नामित शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग “चहक अभ्यास पुस्तिका” के आधार पर होगी। इसी पुस्तिका के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार कर बच्चों को पढ़ाया जाएगा।
एक कमरे में नहीं चलेंगी दो कक्षाएं
राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक कमरे में दो कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। विभाग का मानना है कि एक साथ दो कक्षाएं चलने से बच्चों का ध्यान भटकता है और पढ़ाई प्रभावित होती है। जिन स्कूलों में कमरों की कमी है, वहां अतिरिक्त व्यवस्था करने को कहा गया है।
