द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 18 मई : बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने राज्य सरकार से चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस बंदी जैसे ज्वलंत और संवेदनशील विषय पर विस्तृत वार्ता के लिए समय देने का अनुरोध किया है। संघ का कहना है कि चिकित्सक संगठनों से संवाद किए बिना इस तरह का निर्णय लागू करना उचित नहीं होगा।
संघ के प्रवक्ता डॉ.विनय कुमार ने कहा कि निजी प्रैक्टिस बंदी पूरी तरह वैकल्पिक होनी चाहिए और चिकित्सकों को अन्य सुविधाएं आईजीआईजीएमएस की तर्ज पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि सरकार पूर्ण प्रतिबंध लागू करना चाहती है, तो इसे केवल नई नियुक्तियों पर लागू किया जाए।
नियुक्ति विज्ञापन में शुरू से ही यह स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि संबंधित पदों पर निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी, ताकि सरकारी सेवा में आने वाले चिकित्सक इस शर्त को स्वीकार करते हुए नियुक्ति ग्रहण करें।
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने यह भी कहा कि वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों पर बिना सहमति और बिना संवाद के किसी प्रकार का एकतरफा निर्णय थोपना न्यायसंगत नहीं होगा। सरकार से आग्रह किया है कि जब तक औपचारिक वार्ता नहीं हो जाती, तब तक इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाए।
संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बिना वार्ता और सहमति के जबरन कोई आदेश लागू करने का प्रयास किया गया, तो उसका पुरजोर विरोध होगा एवं चिकित्सकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
