द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 19 मई : बिहार स्वास्थ्य विभाग की लिपिकीय प्रमोशन सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। विभाग द्वारा 10 मार्च को जारी 2814 लिपिकों की वरियता सूची में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूची में 35 ऐसे कर्मियों के नाम हैं, जिन्हें पैदा होने के कुछ दिन या महीनों बाद ही नौकरी मिल गई। वहीं 119 कर्मियों ने निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार करने के बाद नौकरी ज्वाइन की। सबसे हैरान करने वाला मामला उन कर्मियों का है, जिनकी जन्मतिथि ही भविष्य यानी वर्ष 2070 दर्ज है, लेकिन वे 1996 से नौकरी कर रहे हैं और प्रमोशन भी पा रहे हैं।
पैदा होने के एक महीने बाद नौकरी! : वरियता सूची में शामिल मनोज कुमार जायसवाल का जन्म 4 मई 1975 बताया गया है, जबकि उन्होंने 5 दिसंबर 1977 को नौकरी ज्वाइन कर ली। वहीं राजू प्रसाद का जन्म 15 मार्च 1982 और ज्वाइनिंग 7 अप्रैल 1982 दर्ज है। यानी जन्म के महज एक महीने बाद ही वे सरकारी कर्मचारी बन गए। इतना ही नहीं, उनकी रिटायरमेंट तिथि 31 मार्च 1942 दर्ज है, यानी वे देश की आजादी से पहले ही रिटायर हो चुके हैं।
2070 में जन्म, 1996 में नौकरी! :
सूची में 413वें नंबर पर अरुण कुमार का नाम दर्ज है। उनकी जन्मतिथि 31 सितंबर 2070 है, लेकिन ज्वाइनिंग तिथि 16 मार्च 1996 दर्ज की गई है। यानी उनके जन्म से 74 साल पहले ही उन्हें नौकरी मिल गई। इसी तरह विनोद कुमार का जन्म 22 अक्टूबर 2023 बताया गया है और उन्होंने 22 दिसंबर 2023 को नौकरी ज्वाइन कर ली।
रिटायरमेंट के बाद प्रमोशन की तैयारी: कैमूर में कार्यरत कमलेश कुमार 31 मार्च 2026 को रिटायर हो चुके हैं, लेकिन विभाग अब भी उनके प्रमोशन की प्रक्रिया चला रहा है।
उम्र सीमा के बाद मिली नौकरी : वरियता सूची में 119 ऐसे कर्मियों के नाम हैं, जिन्होंने 42 से 55 वर्ष की आयु में नौकरी ज्वाइन की, जबकि सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष और आरक्षण के साथ 45 वर्ष निर्धारित है।
कटिहार में कार्यरत नागेंद्र कुमार का जन्म 15 फरवरी 1953 और ज्वाइनिंग 15 नवंबर 2024 दर्ज है। इस हिसाब से उनका रिटायरमेंट 15 फरवरी 2053 यानी 100 वर्ष की उम्र में होगा। वहीं मुजफ्फरपुर के सुरेंद्र कुमार ने लगभग 52 वर्ष की आयु में नौकरी ज्वाइन की।
योग्यता की भी अनदेखी : लिपिकीय सेवा में प्रमोशन के लिए हिंदी टाइपिंग, कंप्यूटर और अकाउंट की विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य है। लेकिन सूची में करीब 300 ऐसे कर्मी शामिल हैं, जिन्होंने एक भी परीक्षा पास नहीं की या केवल एक-दो परीक्षाएं ही उत्तीर्ण की हैं। इसके बावजूद केवल उम्र के आधार पर वरियता सूची तैयार कर दी गई।
1700 करोड़ से अधिक वेतन भुगतान का दावा : विभागीय अधिकारियों के अनुसार एक लिपिक की औसत सैलरी करीब 1.10 लाख रुपये है। आरोप है कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 300 से अधिक कर्मी अब तक वेतन, बोनस और अन्य सुविधाओं के रूप में 1700 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त कर चुके हैं।
विभाग ने जांच के दिए संकेत : बिहार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति और प्रमोशन सूची की जांच कराई जाएगी। दस्तावेजों और दिनांक का सत्यापन होने के बाद यदि फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
