पटना, 4 मई | बिहार में जैविक खेती के विस्तार और उससे जुड़ी चुनौतियों पर मंथन के लिए सोमवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “बिहार राज्य में जैविक उत्पादन की संभावना, समस्याएँ एवं समाधान” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से तैयार अनाज एवं फल-सब्जियों के सेवन से लोग अनजाने में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व ग्रहण कर रहे हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, ताकि आम लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बाजार में विश्वसनीय जैविक उत्पादों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। यदि कहीं जैविक उत्पाद मिल भी रहे हैं, तो उनकी प्रमाणिकता को लेकर उपभोक्ताओं में संशय बना रहता है। ऐसे में प्रमाणित जैविक उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पाद भले ही महंगे हों, लेकिन दीर्घकाल में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और इसी दिशा में उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।
कार्यशाला में राज्य भर से आए किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों और जैविक खेती से जुड़े किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। वैशाली से आए किसान कामेश्वर सिंह कुशवाहा ने बताया कि जैविक खेती के शुरुआती चरण में उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन दो से तीन वर्षों के भीतर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने यह भी बताया कि जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य मिलता है और वे अपने उत्पाद देश के कई राज्यों में बेचकर लाभ कमा रहे हैं।
सारण जिले के किसान नर्मदेश्वर गिरी ने बहु-फसली जैविक खेती के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक साथ विभिन्न फसलों की खेती करने से उत्पादन में वृद्धि होती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है। वहीं वैशाली के नवीन कुमार सिंह ने जैविक उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग और सरकारी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव, अपर सचिव कल्पना कुमारी सहित विभाग के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे। सिवान के किसान अंकित कुमार और सारण के रंजीत कुमार सिंह समेत अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने सुझाव रखे।
कार्यशाला के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि बिहार में जैविक खेती की संभावनाएं व्यापक हैं, लेकिन इसके विस्तार के लिए नीति, बाजार और जागरूकता—तीनों स्तरों पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
