पटना, 2 मई। बिहार सरकार ने ग्रामीण सड़कों और आधारभूत संरचना निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। बिहार ग्रामीण कार्य विभाग ने विभिन्न परियोजनाओं में अनियमितता, कार्य में देरी और गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं करने के आरोप में सात ठेकेदार एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उन मामलों में की गई है जहां निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा नहीं हुआ या कार्य की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ परियोजनाओं में रखरखाव और निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।
सरकारी नियमों के अनुसार ब्लैकलिस्ट की गई एजेंसियां निर्धारित अवधि तक विभाग की निविदाओं और नई परियोजनाओं में भाग नहीं ले सकेंगी। इससे अन्य ठेकेदारों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बिहार में ग्रामीण संपर्क मार्ग, पुल-पुलिया और गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने की कई योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है। हाल के महीनों में विभाग ने कई परियोजनाओं की समीक्षा तेज की है और निगरानी तंत्र को मजबूत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। लंबे समय से ग्रामीण इलाकों में घटिया निर्माण, अधूरे कार्य और देरी की शिकायतें उठती रही हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य लंबित और विवादित परियोजनाओं की भी समीक्षा की जा सकती है।
ग्रामीण कार्य विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि बिहार सरकार अब विकास योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर समझौते के मूड में नहीं है।
