नयी दिल्ली, 23 जनवरी मजबूत हाजिर मांग और सटोरियों की ताजा सौदों में लिवाली के चलते शुक्रवार को वायदा कारोबार में बिनौलातेल खली की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में बिनौलातेल खली के फरवरी डिलीवरी वाले अनुबंध का भाव 43 रुपये या 1.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,418 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इस अनुबंध में कुल 53,270 लॉट का कारोबार दर्ज किया गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पशु आहार उद्योग की ओर से लगातार बनी मजबूत मांग ने कीमतों को सहारा दिया है। बिनौलातेल खली का उपयोग मुख्य रूप से पशु आहार के रूप में किया जाता है और सर्दियों के मौसम में इसकी खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। इसके अलावा, हाजिर बाजारों में सीमित आपूर्ति की स्थिति ने भी वायदा कीमतों को ऊपर की ओर धकेला।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में कपास की आवक कुछ क्षेत्रों में कमजोर रही है, जिसका असर बिनौलातेल खली की उपलब्धता पर पड़ा है। इससे हाजिर बाजार में भाव मजबूत बने हुए हैं और इसी रुझान का असर वायदा कारोबार में भी देखने को मिल रहा है। सटोरियों ने भी इस स्थिति को भांपते हुए ताजा लिवाली की, जिससे कीमतों में और तेजी आई।
एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक, कारोबार के दौरान कीमतों में लगातार मजबूती देखी गई और दिन के अंत तक भाव उच्च स्तर पर बंद हुए। बाजार सहभागियों का मानना है कि यदि हाजिर मांग इसी तरह मजबूत बनी रहती है और आपूर्ति में तत्काल सुधार नहीं होता, तो आने वाले दिनों में बिनौलातेल खली के भाव में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली से कीमतों में सीमित गिरावट आ सकती है। लेकिन कुल मिलाकर बाजार की धारणा फिलहाल सकारात्मक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेल और खली से जुड़े अन्य उत्पादों के भाव में स्थिरता भी घरेलू बाजार को समर्थन दे रही है।
व्यापारियों के अनुसार, निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक कपास की आवक, पशु आहार उद्योग की मांग और सटोरिया गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि मौसम और फसल से जुड़ी परिस्थितियां अनुकूल रहीं और आवक में सुधार हुआ, तो कीमतों पर कुछ दबाव आ सकता है। वहीं, मांग मजबूत रहने की स्थिति में बिनौलातेल खली के वायदा भाव ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, शुक्रवार को बिनौलातेल खली वायदा कीमतों में आई तेजी ने बाजार में सक्रियता बढ़ाई है और निवेशकों व कारोबारियों की नजर अब आगामी सत्रों की मांग-आपूर्ति की स्थिति पर टिकी हुई है।