महुआ मोइत्रा केस: हाईकोर्ट ने लोकपाल को दिया अंतिम समय

नयी दिल्ली, 23 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को लोकपाल को कथित ‘नकद के बदले सवाल’ मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को आरोप पत्र दाखिल करने की मंजूरी देने के मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतिम अवसर है और इसके बाद समय बढ़ाने का कोई अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने लोकपाल से अपेक्षा जताई कि वह तय समयसीमा के भीतर इस संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुनाए। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और सार्वजनिक महत्व को देखते हुए इसमें अनावश्यक देरी उचित नहीं है।

यह मामला संसद में ‘नकद के बदले सवाल’ पूछने के कथित आरोपों से जुड़ा है, जिसमें महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के बदले लाभ प्राप्त किया। इन आरोपों के सामने आने के बाद लोकपाल के समक्ष शिकायत दायर की गई थी, जिसके आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की। इसके बाद सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति के लिए लोकपाल से मंजूरी मांगी थी।

हालांकि, लोकपाल द्वारा इस मुद्दे पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, जिस पर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जांच एजेंसियों और संवैधानिक संस्थाओं को समयबद्ध तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।

महुआ मोइत्रा की ओर से पहले ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया जा चुका है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से यह पूरा मामला खड़ा किया गया है। वहीं, दूसरी ओर जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें लोकपाल के फैसले पर टिकी हैं। तय समयसीमा के भीतर लिया गया निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि सीबीआई महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर पाएगी या नहीं। यह फैसला न केवल इस मामले के भविष्य को तय करेगा, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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