तहव्वुर राणा पर संजय राउत का बयान

10 अप्रैल, 2025 को 26/11 के आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाया गया। स्पेशल विमान में राणा को दिल्ली लाया गया और इस घटनाक्रम पर अब राजनीति तेज हो गई है। राणा की भारत वापसी के बाद से विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जबकि विपक्षी दल सरकार के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार इसका सिर्फ प्रचार कर रही है ताकि क्रेडिट लिया जा सके।

इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बीजेपी पर कटाक्ष किया और इस मुद्दे को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस पूरे मामले को “तहव्वुर राणा फेस्टिवल” बना रही है। राउत ने कहा, “पाकिस्तान की जेल में कुलभूषण जाधव सड़ रहा है, उसे लेकर आइए न। दाऊद इब्राहिम को लेकर आइए। जब तक बिहार चुनाव होगा, तब तक ये लोग देश में तहव्वुर राणा फेस्टिवल मनाते रहेंगे।”

राउत ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि यह केवल चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार अपनी ओर से प्रचार कर रही है ताकि यह दिखा सके कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सक्रिय है।

संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि तहव्वुर राणा के खिलाफ कानूनी लड़ाई यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा, “तब से यह लड़ाई चल रही थी, जब यह लोग (बीजेपी) सत्ता में नहीं थे। उस समय पीयूष गोयल जैसे लोग नहीं थे। कांग्रेस सरकार ने उस वक्त इसे गंभीरता से लिया और राणा के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की।”

राउत ने यह भी कहा, “बीजेपी ने बाद में यह आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बिरयानी परोसी थी, लेकिन क्या कभी किसी आतंकवादी को बिरयानी दी जाती है? वह सब झूठ था।” उन्होंने यह भी बताया कि तहव्वुर राणा को लेकर लाए जाने का निर्णय यूपीए सरकार के दौरान लिया गया था और इस प्रकार के आरोपों से बचने के लिए बीजेपी को सावधान रहना चाहिए।

इसके अलावा, राउत ने अबू सलेम का भी उल्लेख किया, जिसे यूपीए सरकार के दौरान पुर्तगाल से भारत लाया गया था। राउत ने कहा, “अबू सलेम सबसे खतरनाक आतंकवादी था, जो दाऊद इब्राहिम का दाहिना हाथ था और 1993 के मुंबई बम धमाकों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।”

संजय राउत के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्मा गया है और यह दिखाता है कि इस मामले में न केवल सरकार और विपक्ष के बीच की दूरी बढ़ी है, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो गया है।

हालांकि तहव्वुर राणा की भारत वापसी एक अहम कदम है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इस मामले का राजनीतिकरण हो रहा है और विपक्ष इसे सरकार के प्रचार के रूप में देख रहा है। भारतीय राजनीति में ऐसे घटनाक्रम आमतौर पर बड़े विवादों का कारण बनते हैं और यह मुद्दा भी भविष्य में कई सवालों को जन्म दे सकता है।

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