नेत्रदान से मिलता है अमरत्व, पीड़ित मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम : गंगा प्रसाद

द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 17 मई : दधीचि देहदान समिति की पहल पर बुद्ध मार्ग निवासी स्वर्गीय श्रीमती पाना देवी झुनझुनवाला के निधन के बाद उनके परिवार द्वारा नेत्रदान कराया गया। इस मानवीय पहल से कम से कम दो नेत्रहीनों को नई रोशनी मिल सकी। रविवार को उनके आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में समिति की ओर से नेत्रदानी परिवार को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में समिति के अध्यक्ष एवं गंगा प्रसाद ने कहा कि मृत्यु तो निश्चित है, लेकिन मृत्यु के बाद भी अमर बने रहने का सबसे श्रेष्ठ तरीका नेत्रदान और अंगदान है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे नेत्रदान का संकल्प लेकर पीड़ित मानवता की सेवा में आगे आएं।
इस अवसर पर स्वर्गीय पाना देवी झुनझुनवाला के पति विशम्भवर झुनझुनवाला तथा उनके पांच भाइयों — नरेश झुनझुनवाला, रमेश झुनझुनवाला, सुरेश झुनझुनवाला, महेश झुनझुनवाला एवं दिनेश झुनझुनवाला को समिति की ओर से सम्मानित किया गया।
समिति के वरीय उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष प्रसाद ने कहा कि महर्षि दधीचि की अंगदान परंपरा को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से समाजहित में अंगदान और नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की।
नेत्रदानी परिवार ने समिति के सहयोग के लिए 21 हजार रुपये की राशि भी दानस्वरूप प्रदान की। कार्यक्रम में समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप चौरसिया, संजीव यादव, अरुण सत्यमूर्ति, गोविंद कनोडिया, मुकेश हिसारिया, गुरु रहमान एवं विनीता मिश्रा सहित अन्य सदस्यों ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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