सिल्वर बार आयात पर नई पाबंदी से बाजार में बढ़ सकती है हलचल, AIJGF ने जताई चिंता

द मीडिया टाइम्स डेस्क

पटना, 17 मई : भारत सरकार द्वारा ITC (HS) कोड 71069221 और 71069229 के तहत आने वाले सिल्वर बार और सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर बार की आयात नीति को “Free” से “Restricted” किए जाने के बाद देश के बुलियन और ज्वेलरी कारोबार में चिंता बढ़ गई है। इस फैसले के बाद अब इन श्रेणी के सिल्वर बार का आयात स्वतः नहीं हो सकेगा और आयातकों को निर्धारित अनुमति प्रक्रिया एवं नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा। सरकार का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
AIJGF ने आशंका जताई है कि इस निर्णय का सीधा असर घरेलू चांदी सप्लाई चेन, ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग प्रीमियम और औद्योगिक उपयोग पर पड़ सकता है। संगठन का कहना है कि भारत में चांदी की मांग केवल आभूषण उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूजा सामग्री, चांदी के बर्तन, निवेश उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर सेक्टर और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि यदि आयात प्रक्रिया में लाइसेंसिंग देरी, क्लीयरेंस बाधाएं या नीति संबंधी अस्पष्टता बनी रही तो घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में भारतीय बाजार में सिल्वर प्रीमियम तेजी से बढ़ सकता है और MCX से लेकर फिजिकल मार्केट तक असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य आयात निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाना है तो उद्योग उसका समर्थन करता है, लेकिन नीति का क्रियान्वयन ऐसा होना चाहिए जिससे वैध आयातकों, ज्वेलरी निर्माताओं और छोटे व्यापारियों की सप्लाई चेन प्रभावित न हो।
प्रदेश महासचिव प्रेम नाथ गुप्ता ने कहा कि इस निर्णय से घरेलू बाजार में कृत्रिम प्रीमियम बढ़ने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर रहने के बावजूद भारत में चांदी ऊंचे प्रीमियम पर ट्रेड कर सकती है। उन्होंने सरकार और DGFT से वैध बुलियन एवं ज्वेलरी कारोबारियों के लिए आयात अनुमति प्रक्रिया को तुरंत स्पष्ट करने की मांग की, ताकि बाजार में भ्रम और अनावश्यक सट्टेबाजी को रोका जा सके।
AIJGF ने सरकार से मांग की है कि Policy Condition No. 7, licence प्रक्रिया, eligible importers, port clearance और operational guidelines से जुड़ी स्पष्ट जानकारी जल्द जारी की जाए। संगठन का कहना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बनी रहेगी और छोटे एवं मध्यम ज्वेलर्स को नुकसान से बचाया जा सकेगा।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला रिटेल ज्वेलरी बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन कच्चे माल के आयात पर नियंत्रण के कारण आने वाले दिनों में घरेलू कीमतों और उपलब्धता पर असर दिखाई दे सकता है।
प्रमुख मांगें
• DGFT विस्तृत clarification जारी करे
• वैध बुलियन और ज्वेलरी आयातकों के लिए fast-track approval mechanism बनाया जाए
• छोटे और मध्यम ज्वेलर्स की सप्लाई बाधित न हो
• घरेलू बाजार में artificial premium और hoarding रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए
• MCX और physical market premium पर सरकार विशेष नजर रखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *