द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना,16 मई :ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के अवसर पर शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ श्रद्धा एवं आस्था से वट सावित्री व्रत किया। सुबह से ही महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की तैयारियों में जुटी रहीं। मंदिरों और वट वृक्षों के आसपास विशेष चहल-पहल देखी गई।
महिलाओं ने वट वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना कर उसकी परिक्रमा की तथा कच्चा सूत बांधकर पति की दीर्घायु की कामना की। इसके बाद सामूहिक रूप से सत्यवान-सावित्री की पारंपरिक कथा सुनी गई। पूजा के उपरांत महिलाओं ने बांस निर्मित पंखे से वट वृक्ष को हवा भी की। धार्मिक मान्यता के अनुसार बांस को वंश वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
भविष्य पुराण के अनुसार इस व्रत में अंकुरित चने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यमराज ने चने के रूप में ही सत्यवान के प्राण सावित्री को वापस किए थे। इसी कारण पूजा में चने का उपयोग शुभ माना जाता है।
सत्यवान-सावित्री की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजकुमारी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था। विवाह से पहले ही यह भविष्यवाणी हो चुकी थी कि सत्यवान की आयु अल्प है, लेकिन सावित्री ने उन्हें ही अपने पति के रूप में चुना। नियत समय आने पर जब सत्यवान की मृत्यु हो गई, तब यमराज उनके प्राण हरकर ले जाने लगे। सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप, बुद्धिमत्ता और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज को प्रसन्न कर लिया। अंततः यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया।
तभी से वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ व्रत एवं पूजा संपन्न की।
