पटना, 11 मई | मातृत्व दिवस के अवसर पर शनिवार को राजधानी पटना के होटल चाणक्या में बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी की ओर से एक अनूठे सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “हेल्थकेयर में समग्र उत्कृष्टता के लिए अंतःविषय ज्ञान” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा, पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक समन्वय का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 100 से अधिक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने भाग लिया।
इस CME कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि वैज्ञानिक सत्रों में वक्ता के रूप में डॉक्टरों की पत्नियों ने भाग लिया। चिकित्सा जगत में इसे एक नई और सकारात्मक पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा समुदाय के भीतर बेहतर समन्वय स्थापित करना, परिवार और पेशे के बीच संतुलन को बढ़ावा देना तथा अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों के अनुभवों को साझा करना था।
कार्यक्रम का आयोजन बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमूल्य कुमार सिंह, सचिव डॉ. रितेश रूनू, पटना ऑर्थोपेडिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. जीवेंदु चौधरी और सचिव डॉ. अर्णब सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बशीर आलम और डॉ. कैप्टन विजय शंकर सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित डॉ. आर.एन. सिंह, डॉ. एस.एस. झा और डॉ. रंजीत सिंह समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। डॉ. श्री रूपा ने कहा, *“त्वचा कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत देती है, इसलिए समय पर पहचान बेहद जरूरी है।”* वहीं डॉ. ऋचा ठाकुर ने खेलकूद के दौरान होने वाली त्वचा समस्याओं और उनकी रोकथाम पर विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. श्वेता लाल ने कहा, *“अच्छा दंत स्वास्थ्य पूरे शरीर के बेहतर स्वास्थ्य की नींव है।”* वहीं ऑटिज्म जागरूकता पर बोलते हुए डॉ. शची गुंजन ने कहा, *“हमें बच्चों को बदलने की नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने की जरूरत है।”*
दर्द प्रबंधन पर चर्चा करते हुए डॉ. श्रुतिका भगत ने कहा, *“योग, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक उपचार कई समस्याओं में दवा से बेहतर सहायक साबित हो सकते हैं।”* वहीं डॉ. अलका ने कमर दर्द से बचाव के लिए सही बैठने की मुद्रा और नियमित स्ट्रेचिंग को जरूरी बताया।
महिला स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़े विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई। डॉ. नीलू प्रसाद ने कहा, *“बदलती जीवनशैली और बढ़ता प्रदूषण प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है, इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।”* वहीं डॉ. खुशबू ने सहायक प्रजनन तकनीक और प्राकृतिक गर्भधारण के उपायों पर जानकारी साझा की। स्तन कैंसर जागरूकता पर बोलते हुए डॉ. मनीषा सिंह ने कहा, *“नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली से स्तन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।”*
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित चिकित्सकों ने इस पहल को चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जुड़ाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। कई डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह के आयोजन चिकित्सा समुदाय को नई सोच, बेहतर संवाद और मजबूत समन्वय की दिशा में प्रेरित करेंगे।
