द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 6 मई | राजधानी पटना में एक परिवार ने दुख की घड़ी को मानव सेवा का माध्यम बनाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। बुद्ध मार्ग निवासी 85 वर्षीय स्मृतिशेष पाना देवी झुनझुनवाला के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान कराकर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल कायम की। परिवार के इस निर्णय से अब 2 से 3 नेत्रहीनों की जिंदगी में नई रोशनी लौट सकेगी।
दधीचि देहदान समिति के जागरूकता अभियान का सकारात्मक प्रभाव लगातार समाज में देखने को मिल रहा है। समिति के प्रयासों से लोग अब नेत्रदान, अंगदान और देहदान जैसे सामाजिक कार्यों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। पाना देवी झुनझुनवाला के परिवार ने भी इसी प्रेरणा से नेत्रदान का फैसला लिया और मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का संदेश दिया।
परिजनों ने बताया कि दुख की इस घड़ी में उन्होंने यह महसूस किया कि यदि किसी के नेत्र किसी और की जिंदगी रोशन कर सकते हैं, तो इससे बड़ा पुण्य कार्य कोई नहीं हो सकता। इस पुनीत कार्य में दामाद अशोक राजगढ़िया, पुत्र नरेश झुनझुनवाला, रमेश झुनझुनवाला, सुरेश झुनझुनवाला, महेश झुनझुनवाला, दिनेश झुनझुनवाला, पुत्री सरिता देवी तथा समाजसेवी गोविंद कानोडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के सामूहिक प्रयास से इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के नेत्र अधिकोष की टीम को सफलतापूर्वक कॉर्निया सौंपा गया।
आईजीआईएमएस के नेत्र अधिकोष प्रमुख डॉ. नीलेश मोहन के निर्देश पर डॉ. अंजुरी, मारुति नंदन और ठाकुर रवि की टीम ने कॉर्निया संग्रहण की प्रक्रिया पूरी की। चिकित्सकों ने बताया कि नेत्रदान ऐसा महादान है, जो किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी उसकी आंखों को जीवित रखता है और कई नेत्रहीनों को नई जिंदगी देने का काम करता है।
दधीचि देहदान समिति ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन मृत्यु के बाद भी मानव सेवा के माध्यम से व्यक्ति समाज में हमेशा जीवित रह सकता है। समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद तथा महासचिव बिमल जैन ने लोगों से नेत्रदान, अंगदान और देहदान का संकल्प लेने की अपील की।
समिति ने कहा कि महर्षि दधीचि की त्याग, सेवा और समर्पण की परंपरा आज भी समाज को प्रेरित कर रही है। यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं, तो हजारों नेत्रहीनों की जिंदगी में उजाला लाया जा सकता है। पाना देवी झुनझुनवाला के परिवार का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन गया है कि इंसान मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा कर अमर बन सकता है।

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