लोक भवन में राज्यपाल ने अवकाश प्राप्त सैनिक गुप्तेश्वर नाथ दुबे की दो आध्यात्मिक पुस्तकों का किया लोकार्पण

लोक भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में महामहिम राज्यपाल ने अवकाश प्राप्त सैनिक एवं लेखक गुप्तेश्वर नाथ दुबे द्वारा लिखित दो आध्यात्मिक एवं दार्शनिक पुस्तकों का विधिवत लोकार्पण किया। विमोचित पुस्तकों में “श्री रामचरितमानस के कुछ स्मरणीय प्रसंग” तथा “चिंतन, मंथन एवं अंतरबोध संकलन” शामिल हैं। यह आयोजन साहित्य, अध्यात्म और वैचारिक विमर्श का प्रभावशाली संगम बनकर उभरा।

लोकार्पण के अवसर पर राज्यपाल महोदय ने कहा कि आध्यात्मिक और दार्शनिक साहित्य समाज को आत्मचिंतन की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ग्रंथ वर्तमान समय में व्यक्ति को मानसिक संतुलन, नैतिक दृष्टि और जीवन के उद्देश्य को समझने में सहायक सिद्ध होते हैं। राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुस्तकें पाठकों को आत्मिक शांति और सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान करेंगी।

रामचरितमानस के चयनित प्रसंगों पर आधारित पहली पुस्तक
पुस्तक “श्री रामचरितमानस के कुछ स्मरणीय प्रसंग” में गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के उन प्रमुख प्रसंगों को संकलित किया गया है, जो मानव जीवन को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं। लेखक के अनुसार रामचरितमानस की चौपाइयाँ, दोहे और छंद अपने आप में पूर्ण जीवन दर्शन हैं। यदि संपूर्ण ग्रंथ का अध्ययन संभव न हो, तो भी उसके चयनित प्रसंग जीवन पथ को सही दिशा देने में सक्षम हैं। इसी विचारधारा के आधार पर इस कृति की रचना की गई है।

चिंतन और आत्मबोध पर केंद्रित दूसरी कृति
दूसरी पुस्तक “चिंतन, मंथन एवं अंतरबोध संकलन” व्यक्ति के सर्वांगीण और संतुलित विकास पर केंद्रित है। इसमें सिद्ध मनीषियों, महात्माओं, आचार्यों और समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों के विचारों का संकलन किया गया है। पुस्तक में धर्म, अध्यात्म, योग, ध्यान, प्राणायाम और मनोविज्ञान जैसे विषयों को सरल, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक आत्मबोध और आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ सकें।

गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर अनिल सिंह (राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय जनता मजदूर संघ), शोभा सिंह (पूर्व महिला जिला अध्यक्ष, भाजपा रांची), डॉ. अरुण कुमार दुबे, डॉ. प्रियंका दुबे, रिद्धि दुबे और हर्षित दुबे सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने लेखक को इस साहित्यिक योगदान के लिए बधाई दी और पुस्तकों को समाज के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।

यह विमोचन समारोह साहित्य और अध्यात्म के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

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