मुझे मैदान के बाहर के अपने व्यवहार के बारे में और सीखने की जरूरत: ब्रूक

पल्लेकल (श्रीलंका) इंग्लैंड की सीमित ओवरों की क्रिकेट टीम के कप्तान हैरी ब्रूक ने स्वीकार किया है कि उन्हें मैदान के बाहर अपने व्यवहार को लेकर अभी काफी कुछ सीखने की जरूरत है। उन्होंने माना कि पिछले वर्ष अक्टूबर में वेलिंगटन में एक नाइट क्लब के बाहर हुए झगड़े को लेकर उन्होंने अपनी टीम के साथियों को बचाने के लिए पूरी सच्चाई सामने नहीं रखी थी।

ब्रूक ने कहा कि उस घटना ने उन्हें आत्ममंथन करने का अवसर दिया और यह समझने में मदद की कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और कप्तान के रूप में उनकी जिम्मेदारियां सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए उनके हर कदम और व्यवहार का असर टीम, प्रशंसकों और खेल की छवि पर पड़ता है।

गौरतलब है कि इससे पहले हैरी ब्रूक ने यह बयान दिया था कि जिस रात नाइट क्लब के बाहर उनके साथ झगड़ा हुआ और बाउंसर ने उन्हें मुक्का मारा, उस समय वह अकेले थे। हालांकि अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने कुछ साथियों को विवाद से दूर रखने के उद्देश्य से उस घटना की वास्तविक परिस्थितियों को छिपाया था। ब्रूक के अनुसार, यह फैसला उन्होंने भावनात्मक स्थिति में लिया, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि ईमानदारी और पारदर्शिता अधिक जरूरी थी।

ब्रूक ने कहा, “मैं अभी सीखने की प्रक्रिया में हूं। मैदान के बाहर मेरा व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मैदान के अंदर का प्रदर्शन। कप्तान होने के नाते मुझे उदाहरण पेश करना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस अनुभव ने उन्हें अधिक परिपक्व बनने और भविष्य में बेहतर निर्णय लेने में मदद की है।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की ओर से इस मामले में पहले ही यह कहा जा चुका है कि खिलाड़ियों से अनुशासन और पेशेवर व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। हालांकि बोर्ड ने ब्रूक के आत्मस्वीकृति और जिम्मेदारी लेने के रवैये को सकारात्मक कदम माना है।

फिलहाल इंग्लैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर है और ब्रूक का ध्यान आगामी मुकाबलों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रकरण को पीछे छोड़कर क्रिकेट पर पूरा फोकस करना चाहते हैं और मैदान के अंदर अपने प्रदर्शन के जरिए टीम का नेतृत्व करना चाहते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के निजी जीवन और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जाती है। ब्रूक का यह स्वीकारोक्ति भरा बयान यह दर्शाता है कि युवा खिलाड़ी अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

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