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बच्चों के लिए क्यों जरूरी है योग

  योग विशेषज्ञ कहते हैं, स्कूली उम्र के बच्चों (6 से 12 वर्ष की आयु) में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधार के लिए योग और मेडिटेशन के अभ्यास को काफी कारगर माना गया है। योग बच्चों में शारीरिक संतुलन और शक्ति में सुधार करते हैं। बच्चों के लिए योग की आदत मनोवैज्ञानिक लाभ प्रदान कर सकती है। नियमित रूप से योगासनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप बच्चों को कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं।
सर्वांगासन योग का अभ्यास

बच्चों के लिए नियमित रूप से सर्वांगासन योग का अभ्यास करना विशेष लाभकारी माना जाता है। यह आसन मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर कोशिकाओं को पोषण देता है, जो बेहतर मानसिक स्थिति के लिए आवश्यक है। यह आसन हाथ और पैर को मजबूत भी करता है। रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए रखने के साथ कंधों की मजबूती के लिए भी सर्वांगासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बच्चों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

वृक्षासन योग की आदत

हाथों और पैरों को टोन करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वृक्षासन योग के अभ्यास को विशेषज्ञ काफी लाभप्रद मानते हैं। बढ़ते बच्चों के लिए इस योग को काफी फायदेमंद माना जाता है, यह लंबाई को बढ़ाने में भी सहायक है। यह आसन एकाग्रता शक्ति और ध्यान बढ़ाने के साथ मन-शरीर के संतुलन को बढ़ाता है। बच्चों के लिए इस योग के अभ्यास की आदत बनाना काफी फायदेमंद हो सकता है।

सूर्य नमस्कार12 अलग-अलग प्रकार के योगासनों का समूह है जो कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ दे सकता है। यह तंत्रिका तंत्र को आराम देने के साथ पैरों और कूल्हों में लचीलापन बढ़ाता है जिससे शारीरिक गति में सुधार होता है। पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने और याददाश्त में सुधार करने के लिए सूर्य नमस्कार के आसन काफी कारगर हैं। सूर्य नमस्कार के आसन समग्र स्वास्थ्य कल्याण के लिए आपकी मदद कर सकते हैं।

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