न्यायाधीश ने चीनी वीजा से जुड़े मामले में कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

नयी दिल्ली, 23 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने शुक्रवार को कथित चीनी वीजा घोटाले से जुड़े मामले में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (रिक्यूज) कर लिया। इस याचिका में कार्ति चिदंबरम ने अपने खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोपों को चुनौती दी है। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।

अदालत की कार्यवाही के दौरान न्यायमूर्ति कथपालिया ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस मामले की सुनवाई न करने का फैसला किया। न्यायिक परंपराओं के अनुसार, किसी भी संभावित हितों के टकराव या निष्पक्षता पर सवाल से बचने के लिए न्यायाधीश स्वयं को मामले से अलग कर सकते हैं। इसके बाद यह मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय की किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि यह मामला वर्ष 2011 का है, जब कथित तौर पर चीन की एक कंपनी को भारत में अपने कर्मचारियों के लिए वीजा दिलाने में अनियमितताओं का आरोप लगा था। उस समय कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए नियमों को दरकिनार कर वीजा दिलाने में मदद की। सीबीआई का दावा है कि इसके बदले में कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया और यह पूरा मामला भ्रष्टाचार तथा आपराधिक साजिश की श्रेणी में आता है।

कार्ति चिदंबरम इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और उनके खिलाफ जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच की प्रक्रिया कानून के दायरे में नहीं है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए।

सीबीआई ने अदालत में पहले दलील दी थी कि जांच प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और मामले में कई अहम दस्तावेज तथा गवाह सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार, यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं बल्कि संगठित साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसकी गहन जांच जरूरी है।

न्यायमूर्ति कथपालिया के खुद को अलग करने के बाद अब इस याचिका की सुनवाई की अगली तारीख और नई पीठ का गठन उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा तय किया जाएगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस कदम से मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित होगी और किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकेगा।

फिलहाल, सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि नई पीठ इस याचिका पर कब सुनवाई शुरू करती है और अदालत इस बहुचर्चित चीनी वीजा मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।

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