द मिडिया टाइम्स
पटना, 12 मई
गर्दनीबाग अस्पताल में रविवार देर रात एक संदिग्ध व्यक्ति को फार्मासिस्ट के भेष में घूमते हुए पकड़ा गया। सिविल सर्जन डॉ. वाईपी मंडल ने पूछताछ के दौरान उसकी पहचान पर संदेह जताते हुए चेतावनी दी कि यदि वह दोबारा अस्पताल परिसर में दिखाई दिया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल परिसरों को दलाल मुक्त बनाने और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, पूछताछ में युवक ने खुद को फार्मासिस्ट और फार्मेसी का छात्र बताया। इस पर डॉ. मंडल ने उससे कई सवाल किए और कहा कि वह अस्पताल में कार्यरत सभी फार्मासिस्टों को पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को कर्मचारियों की सूची से उसका मिलान कराया जाएगा।
सिविल सर्जन ने युवक की उम्र पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उसकी उम्र काफी अधिक थी, जबकि वह खुद को फार्मेसी का छात्र बता रहा था। मामले को संदिग्ध मानते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, सीएस कार्यालय और गर्दनीबाग अस्पताल परिसर में लंबे समय से दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय है, जो गरीब मरीजों से मेडिकल प्रमाण पत्र, दिव्यांग प्रमाण पत्र और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कागजात बनवाने के नाम पर अवैध वसूली करता है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी अधेड़ उम्र का व्यक्ति डॉक्टरों और नर्सों के बीच बैठकर खुद को फार्मासिस्ट बताता था और बाढ़ के किसी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई करने का दावा करता था।
डॉ. मंडल ने कहा कि यह भी जांच की जाएगी कि संदिग्ध व्यक्ति किसकी मदद से अस्पताल परिसर में बैठ रहा था। जांच में जो भी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले पीएमसीएच की इमरजेंसी में भी नर्सिंग स्टाफ के भेष में एक महिला दलाल पकड़ी गई थी। हालांकि बाद में उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। सूत्रों की मानें तो मेडिकल और दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर अस्पतालों और सीएस कार्यालय के आसपास दलालों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाता है।
