BIHAR POLITICS : राबड़ी सरकारी आवास विवाद में नीतीश की इंट्री, पूर्व मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण विभाग के मंत्री को किया तलब, पूरे मामले की ली जानकारी

द मीडिया टाइम्स डेस्क, 2 जून

Rabri Devi news: बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर विवाद और गर्माता जा रहा है। इस मामले को लेकर भवन निर्माण विभाग की मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद फिर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी तल्खी बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर चल रहे विवाद पर चर्चा के लिए नीतीश कुमार ने मंत्री लेसी सिंह को तलब किया था। मुलाकात के दौरान भवन निर्माण विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई, नोटिस और कानूनी प्रक्रिया की पूरी जानकारी उन्हें दी गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान बंगला विवाद के अलावा कई अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि बैठक से बाहर निकलने के बाद जब मीडिया ने मंत्री लेसी सिंह से बातचीत की, तो उन्होंने ज्यादा जानकारी साझा करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि मुलाकात में कई विषयों पर चर्चा हुई है, जिनमें कुछ राजनीतिक मुद्दे भी शामिल हैं। ऐसे मामलों की जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार नियम और कानून के आधार पर काम कर रही है। उनके अनुसार सरकारी आवास से संबंधित जो नियम हैं, वे सभी लोगों पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को नियमानुसार नोटिस जारी किया गया है और यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवास खाली नहीं किया जाता है तो सरकार विधि सम्मत कार्रवाई करेगी।राबड़ी देवी को आवंटित नए आवास और वर्तमान बंगले को खाली करने के मुद्दे पर पहले से ही सियासी बयानबाजी तेज है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। लेसी सिंह के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस मामले में पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं दूसरी ओर राबड़ी देवी भी अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बंगला विवाद बिहार की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना रह सकता है। फिलहाल मंत्री लेसी सिंह द्वारा नीतीश कुमार को पूरी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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