द मीडिया टाइम्स, 31 मई
Bihar news: कटिहार में विकास के दावों और सरकारी योजनाओं की चमक के बीच फलका प्रखंड के मोरसंडा गांव से सामने आई एक तस्वीर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ग्रामीण की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए अर्थी को घुटने भर पानी, कीचड़ और दलदल के बीच से कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा। यह दृश्य देख हर किसी का कलेजा कांप उठा और इलाके की बदहाल बुनियादी व्यवस्था एक बार फिर उजागर हो गई। जानकारी के अनुसार मोरसंडा निवासी करीब 50 वर्षीय अरविंद महलदार का निधन हो गया। श्मशान घाट तक जाने के लिए कोई समुचित सड़क या पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर कमलाघाट नदी के पानी और दलदली रास्ते से होकर शव यात्रा निकालनी पड़ी। अंतिम यात्रा का यह मार्मिक दृश्य इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से कमलाघाट पर पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के साथ बीमार और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाने तक में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मामले को लेकर प्रमुख दीपशिखा सिंह, जिला परिषद प्रतिनिधि मनोज मंडल, उप प्रमुख नेहा प्रवीण, मुखिया राजू नायक और युवा समाजसेवी सागर मिश्रा ने नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि देश को आजादी मिले दशकों बीत गए, लेकिन मोरसंडा के लोगों को आज तक कमलाघाट पर एक अदद पुल नसीब नहीं हुआ। सांसद और विधायक सिर्फ आश्वासन देते रहे, लेकिन धरातल पर काम नहीं दिखा। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब पुल निर्माण की मांग करते हुए कहा कि आखिर कब तक लोग ऐसी नारकीय स्थिति झेलने को मजबूर रहेंगे।
