राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर मानव श्रृंखला, नैनोविज्ञान के जरिए वैज्ञानिक जागरूकता का दिया संदेश

द मीडिया टाइम्स डेस्क

 

पटना, 11 मई | राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर रविवार को विश्वविद्यालय परिसर में “सूक्ष्म शोध, महान परिणाम : नैनोविज्ञान एवं नैनोप्रौद्योगिकी बढ़ाए देश का सम्मान” विषय पर विशेष मानव श्रृंखला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ नैनोविज्ञान एवं नैनोप्रौद्योगिकी की ओर से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और विश्वविद्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

 

कार्यक्रम में लगभग 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर वैज्ञानिक जागरूकता और आधुनिक तकनीक के महत्व का संदेश दिया। दोपहर 3 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्रों के शिक्षक, छात्र और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

 

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शरद कुमार यादव ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. निरंजन प्रसाद यादव, कार्यक्रम संयोजक एवं स्कूल ऑफ नैनोविज्ञान एवं नैनोप्रौद्योगिकी के प्रभारी केंद्राध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

 

कुलपति डॉ. शरद कुमार यादव ने कहा, “आज के दौर में विज्ञान और तकनीक किसी भी देश की प्रगति का सबसे बड़ा आधार है। नैनोविज्ञान और नैनोप्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र भविष्य की तकनीकी दुनिया को दिशा देने वाले हैं।”

 

कार्यक्रम के दौरान आम लोगों तक विज्ञान और नई तकनीकों की जानकारी पहुंचाने तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने मानव श्रृंखला बनाकर विकसित बिहार और विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान की भूमिका को लेकर जागरूकता का संदेश दिया।

 

कार्यक्रम संयोजक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा, “नैनोविज्ञान और नैनोप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे शोध भविष्य में स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकते हैं। हमारा प्रयास है कि शोध को समाज और देश के विकास से जोड़ा जाए।”

 

उन्होंने बताया कि स्कूल ऑफ नैनोविज्ञान एवं नैनोप्रौद्योगिकी की ओर से वर्तमान में 150 से अधिक शोध कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा संस्थान के नाम पर 9 पेटेंट प्रकाशित या स्वीकृत हो चुके हैं। कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित किए जा चुके हैं।

 

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों में वैज्ञानिक सोच और शोध के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *