पटना, 9 मई | बिहार विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मी एवं अभियंता संघ (ऐक्टू–महासंघ गोप गुट) ने स्थायीकरण, वेतनमान और लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। संघ की ओर से जल्द ही पटना में राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके लिए जून के अंतिम सप्ताह में महासंघ गोप गुट के राज्य कार्यालय में सभी जिलों के अध्यक्ष, सचिव और पदाधिकारियों की विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
यह फैसला हाल ही में आयोजित ऑनलाइन बैठक में लिया गया। बैठक में रणविजय कुमार, प्रेमचंद कुमार सिन्हा, रोहित कुमार, कुमार केतु, विभूति कुमार, विनायक कुमार, अमित, रमण कुमार सहित कई जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक के बाद संघ की ओर से कहा गया कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान संविदा कर्मियों ने 16 अगस्त से 19 सितंबर तक 36 दिनों की लंबी हड़ताल की थी। इसी दौरान 19 सितंबर को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के साथ वार्ता हुई थी, जिसमें सरकार की ओर से कई मांगों को लेकर आश्वासन दिया गया था।
संघ के अनुसार सरकार ने अशोक चौधरी समिति की सिफारिशों का लाभ देने, 60 वर्ष तक सेवा नियमित करने, मानदेय बढ़ाने, अवकाश सुविधा देने, नियमित नियुक्तियों में 5 से 25 अंकों का अधिभार देने तथा ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं लागू करने की बात कही थी। इसके अलावा हड़ताल के दौरान बर्खास्त किए गए करीब 132 कर्मियों की सेवा बहाल करने का भी आश्वासन दिया गया था।
संघ का कहना है कि चुनाव के बाद बर्खास्त कर्मियों की सेवा तो बहाल कर दी गई, लेकिन बाकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे संविदा कर्मियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संगठन ने कहा कि नई सरकार बने छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्थायीकरण और वेतनमान जैसे अहम मुद्दों पर अभी तक फैसला नहीं लिया गया।
संघ ने सरकार से मुख्य सचिव द्वारा दिए गए आश्वासनों को जल्द लागू करने की मांग की है। साथ ही कहा गया है कि आगामी राज्यस्तरीय सम्मेलन में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी और संगठन को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। संविदा कर्मियों ने साफ कहा है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
