कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद एक्शन मोड में सरकार, मुख्यमंत्री सचिवालय में नए मंत्रियों संग चली लंबी बैठक

द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 8 मई | बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई देने लगी है। गुरुवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार मंत्रिपरिषद के सभी नवनियुक्त मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में “विकसित भारत” के संकल्प के साथ “समृद्ध बिहार” के विज़न को जमीन पर उतारने को लेकर व्यापक मंथन किया गया।

सूत्रों के अनुसार बैठक केवल औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सरकार की प्राथमिकताओं, विभागों की जिम्मेदारियों और आगामी राजनीतिक एवं प्रशासनिक रणनीति पर गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि नई सरकार का फोकस केवल राजनीतिक संतुलन नहीं बल्कि परिणाम देने वाली कार्यशैली पर रहेगा।

बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, सुशासन, कानून-व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार की कोशिश यह दिखाने की रही कि मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद अब प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाई जाएगी और जनता से जुड़े मुद्दों पर त्वरित फैसले लिए जाएंगे।

राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार में कई नए और चर्चित चेहरों को जगह मिली है। खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद सरकार और संगठन दोनों पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई यह पहली सामूहिक बैठक कई राजनीतिक संदेश भी देती नजर आई।

सूत्रों की मानें तो बैठक में मंत्रियों को विभागीय कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और तेज निर्णय प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और जनता के बीच सरकार की सकारात्मक छवि मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एनडीए सरकार इस बार सिर्फ जातीय और राजनीतिक समीकरणों तक सीमित रहने के बजाय ‘परफॉर्मेंस मॉडल’ की छवि बनाना चाहती है। यही वजह है कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में इस तरह की विस्तृत बैठक आयोजित की गई।

हालांकि विपक्ष ने इस बैठक को लेकर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को बैठकों और विज़न की बातों से ज्यादा जमीनी समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं सत्ता पक्ष का दावा है कि नई कैबिनेट बिहार को विकास और सुशासन की नई दिशा देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों में नजर इस बात पर टिकी है कि नई टीम अपने वादों और विज़न को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से धरातल पर उतार पाती है।

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