द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 7 मई | बिहार की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला, जब राजधानी पटना के गांधी मैदान में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में आयोजित भव्य समारोह में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।
गांधी मैदान में आयोजित इस समारोह को एनडीए की राजनीतिक ताकत और आगामी चुनावों की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो ने राजधानी का राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया। एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे शहर में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर रही। लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ लेकर औपचारिक रूप से सत्ता की राजनीति में एंट्री कर ली। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बेटे निशांत की पीठ थपथपाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। यह दृश्य गांधी मैदान में मौजूद लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बना रहा।
इस मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा, जदयू, एलजेपीआर, हम और आरएलएम सहित एनडीए के सभी सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट पूरी तरह जातीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। भाजपा और जदयू ने जहां सवर्ण, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और महादलित समाज के नेताओं को जगह दी, वहीं मुस्लिम समाज को साधने के लिए जमा खान को भी मंत्रिमंडल में बनाए रखा गया।
दलित और महादलित राजनीति को मजबूत करने के लिए पासवान, मुसहर, रविदास और पासी समाज से कई चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर से संजय पासवान को जगह देकर पासवान समाज को साधने की कोशिश की गई, जबकि जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन मुसहर समाज का प्रतिनिधित्व करते नजर आए। इसके अलावा रत्नेश सदा को भी महादलित वर्ग का मजबूत चेहरा माना जा रहा है।
ब्राह्मण समाज से भाजपा के वरिष्ठ नेता नीतीश मिश्रा और मिथलेश तिवारी को मंत्रिमंडल में शामिल कर सवर्ण वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। वहीं सम्राट चौधरी सरकार ने कुर्मी, यादव, कुशवाहा, मल्लाह, धानुक, गंगोता, तेली, वैश्य और अन्य पिछड़े वर्गों को भी प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं बल्कि आगामी चुनावों से पहले एनडीए की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का बड़ा संदेश है। मंत्रिमंडल में राजनीतिक परिवारों के कई नेताओं को जगह मिलने से विपक्ष ने ‘फैमिली फर्स्ट’ और वंशवाद का मुद्दा भी उठाना शुरू कर दिया है। हालांकि एनडीए नेताओं का दावा है कि मंत्रियों का चयन अनुभव, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर किया गया है।
गांधी मैदान में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई टीम सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है।

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