द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 6 मई | बिहार में 7 मई को होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी पटना में सत्ता के गलियारों से लेकर पार्टी कार्यालयों तक लगातार बैठकों का दौर जारी है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की चर्चाओं ने बिहार की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है। जदयू के भीतर से उनके नाम की मांग उठने लगी है, जबकि सहयोगी दलों के नेताओं के बयान भी इस चर्चा को नई दिशा दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जदयू और भाजपा दोनों अपने-अपने स्तर पर मंथन में जुटे हैं। जदयू की ओर से संभावित मंत्रियों की सूची लगभग तैयार मानी जा रही है, जबकि भाजपा अभी अंतिम नामों पर चर्चा कर रही है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह के पटना दौरे के दौरान होने वाली अहम बैठक में नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम सहमति बन सकती है।
राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में इस समय निशांत कुमार का नाम है। अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत को मंत्री बनाए जाने की संभावना को लेकर जदयू के अंदर समर्थन बढ़ता दिखाई दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि अन्य नेताओं के बेटे मंत्री बन सकते हैं तो निशांत कुमार को भी मौका मिलना चाहिए। वहीं मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने भी निशांत कुमार को लेकर खुशी जताई है और कहा है कि “खून का असर जरूर दिखेगा।”
सूत्रों का दावा है कि कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर महत्वपूर्ण बैठक हुई है, जिसमें पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ संभावित नामों पर चर्चा की गई। हालांकि अब तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और नेताओं के बयानों से यह साफ है कि कैबिनेट विस्तार में कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।
पटना के गांधी मैदान में 7 मई को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय नेताओं के शामिल होने की संभावना के कारण राजधानी में हाई अलर्ट की स्थिति है। एयरपोर्ट से लेकर गांधी मैदान तक सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं और ट्रैफिक व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल मंत्रियों के शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एनडीए की राजनीतिक रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच भी बन सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सच में निशांत कुमार बिहार की राजनीति में नई भूमिका के साथ एंट्री करेंगे या यह चर्चा सिर्फ सियासी अटकल बनकर रह जाएगी।
