पटना।नीट की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पटना हाई कोर्ट ने दाखिल आपराधिक रिट याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच पहले ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप चुकी है, ऐसे में फिलहाल हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने दिया।
कोर्ट ने यह फैसला नीट छात्रा के पिता नवीन कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। याचिका में मांग की गई थी कि सीबीआई द्वारा की जा रही जांच की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाई कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने साफ कहा कि जब सरकार स्वयं इस मामले को सीबीआई को सौंप चुकी है, तो जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह मामला जनहित याचिका (PIL) के दायरे में नहीं आता, जिसमें जांच की निगरानी आवश्यक हो। बिना जांच रिपोर्ट आए ही मॉनिटरिंग का आदेश देना उचित नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने कहा कि पहले सीबीआई को अपनी जांच पूरी करने दी जाए। यदि जांच पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को किसी प्रकार की कमी, त्रुटि या आपत्ति नजर आती है, तो वे पुनः हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं। आरोप लगाया गया कि राज्य के डीजीपी और पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से दबाव बनाया जा रहा है और उनसे यह स्वीकार करने को कहा जा रहा है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि परिवार और रिश्तेदारों को अलग-अलग तरीकों से डराने और धमकाने की कोशिश की जा रही है, ताकि मामले को दबाया जा सके। परिवार का कहना है कि वे सच्चाई सामने लाना चाहते हैं।
इन आरोपों पर कोर्ट ने कहा कि अब मामला सीबीआई के पास है और जांच एजेंसी निष्पक्ष तरीके से मामले की पड़ताल करेगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीबीआई जांच में पूरा सहयोग करने की सलाह दी और भरोसा जताया कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सीबीआई जांच के दौरान या जांच पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को किसी प्रकार की शिकायत होती है, तो वे फिर से न्यायालय का रुख कर सकते हैं। इस आदेश के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निष्पादन कर दिया। अब पूरे मामले की आगे की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी।

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