‘एसिड जैसा पानी’, ‘गंदा नाला’, ‘भयानक बदबू’: इंदौर मौतों से पहले अनसुनी रहीं शिकायतें, अफसरशाही की लापरवाही से नहीं सुधरी पाइपलाइन |

इंदौर में हुई हालिया मौतों से पहले स्थानीय लोगों ने बार-बार दूषित पानी, बदबू और स्वास्थ्य जोखिम को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते समस्या जस की तस बनी रही। अब इन मौतों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या जानें बचाई जा सकती थीं?

“पानी पीने लायक नहीं था”

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इलाके में सप्लाई होने वाला पानी:

  • एसिड जैसा जलन पैदा करने वाला

  • नाले के पानी जैसी गंध वाला

  • पीने के बाद उल्टी, पेट दर्द और चक्कर की शिकायतें देने वाला

लोगों का कहना है कि महीनों से पानी की हालत खराब थी, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं

निवासियों ने:

  • नगर निगम

  • जल आपूर्ति विभाग

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों

से कई बार पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की शिकायत की। बावजूद इसके, पाइपलाइन की मरम्मत फाइलों में उलझी रही और मौके पर कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

पाइपलाइन में सीवेज मिक्सिंग का शक

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि:

  • पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन

  • सीवेज लाइन के पास से गुजर रही जल आपूर्ति

  • समय पर निरीक्षण न होना

इन कारणों से पीने के पानी में गंदा और जहरीला पानी मिल गया, जिसने हालात को जानलेवा बना दिया।

मौतों के बाद हरकत में प्रशासन

घटना के बाद प्रशासन ने:

  • प्रभावित इलाकों में जल आपूर्ति रोकी

  • टैंकर से साफ पानी की व्यवस्था की

  • जांच के आदेश दिए

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत दिए

हालांकि, स्थानीय लोग इसे “देर से उठाया गया कदम” बता रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि:

  • दूषित पानी से गैस्ट्रो, टाइफाइड, केमिकल पॉइजनिंग जैसी बीमारियां फैल सकती हैं

  • लगातार ऐसे पानी का सेवन जानलेवा हो सकता है

  • बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम ज्यादा होता है

जवाबदेही पर सवाल

यह मामला एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे, निगरानी तंत्र और अफसरशाही की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि अगर शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता, तो यह त्रासदी टल सकती थी।

निष्कर्ष

इंदौर की यह घटना केवल एक स्थानीय हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की चेतावनी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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