हिड़मा के खात्मे से नक्सली नेटवर्क चरमराया, नक्सलवाद मिटाने की ओर बड़ा कदम: अमित शाह |

देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडरों में शुमार हिड़मा की मौत ने सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे नक्सलवाद के सफाए की दिशा में “ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना आने वाले समय में देश के कई नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगी।

हिड़मा का अंत—सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि अमित शाह ने कहा कि हिड़मा नक्सली संगठन का बेहद ख़तरनाक और रणनीतिक कमांडर था। वह कई बड़े हमलों की साजिश में शामिल रहा था और सुरक्षा बलों को लंबे समय से उसकी तलाश थी।
उन्होंने कहा कि हिड़मा के खात्मे से नक्सली नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है और संगठन का संचालन ढांचा कमजोर पड़ गया है।

नक्सलवाद पूरी तरह खत्म करने की तैयारी गृहमंत्री ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
उन्होंने बताया कि—

पिछले वर्षों में नक्सल प्रभाव वाले जिलों की संख्या में तेज़ी से कमी आई है।

सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त रणनीति के चलते नक्सली नेटवर्क बिखरता जा रहा है।

विकास योजनाओं को अब नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से लागू किया जा रहा है।

अमित शाह ने कहा कि हिड़मा जैसे बड़े नाम के खत्म होने से नक्सली कैडर में डर और हताशा का माहौल पैदा हुआ है, जिसका लाभ आने वाले अभियानों में मिलेगा।

सरकार का दावा—‘अब अंत दूर नहीं’ देश भर में नक्सलवाद पर नियंत्रण को लेकर शाह ने विश्वास जताया कि यह आंदोलन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में कई और अभियान चलाए जाएंगे, जो नक्सलियों को समर्पण या समाप्ति, दोनों विकल्पों में से एक चुनने को मजबूर कर देंगे।

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