खेल विभाग में श्रेयसी सिंह ने संभाली जिम्मेदारी, खेल नीति और जिला स्तर पर प्रतिभा विकास पर रहेगा जोर

द मीडिया टाइम्स डेस्क

 

पटना, 11 मई | बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोमवार को पटना स्थित विकास भवन, नया सचिवालय में खेल विभाग से जुड़े कार्यों की समीक्षा की और विभागीय बैठकों में हिस्सा लिया। इस दौरान बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रन शंकरण सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक में राज्य की खेल नीति, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और खेल अवसंरचना के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

 

कार्यभार संभालने के बाद श्रेयसी सिंह ने राज्य में संचालित एकलव्य केंद्रों की समीक्षा की और कहा कि बिहार में खेलों के समग्र विकास के लिए मजबूत खेल नीति बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर खेल नीति का प्रभावी तरीके से पालन किया जाए तो राज्य में खेल संस्कृति को नई दिशा मिल सकती है।

 

श्रेयसी सिंह ने कहा, “बिहार के खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से तैयार करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें सही प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं देना जरूरी है।”

 

उन्होंने प्रत्येक जिले में “डिस्ट्रिक्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि जिला स्तर पर मजबूत खेल संरचना तैयार किए बिना बिहार को खेल हब बनाना संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस योजना तैयार करने को कहा।

 

मंत्री ने कहा, “अगर खिलाड़ियों को अपने जिले में ही अच्छी ट्रेनिंग और सुविधाएं मिलेंगी, तो उन्हें आगे बढ़ने का बेहतर मौका मिलेगा। हमारा लक्ष्य बिहार के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।”

 

बैठक के दौरान श्रेयसी सिंह ने उन मुद्दों की भी जानकारी ली, जो उनके विभागीय कार्यभार से दूर रहने के दौरान सामने आए थे। उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की।

 

श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल की बड़ी भूमिका हो सकती है। उन्होंने इस दिशा में विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने की बात कही, ताकि निजी और सरकारी सहयोग से खेल क्षेत्र में बेहतर निवेश और सुविधाएं विकसित की जा सकें।

 

उन्होंने कहा, “खेलों के विकास के लिए सरकार के साथ निजी संस्थाओं की भागीदारी भी जरूरी है। इससे खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर अवसर मिल सकेंगे।”

 

खेल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नई पहल और योजनाओं से आने वाले समय में बिहार में खेल गतिविधियों को नई गति मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि राज्य के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराया जाए।

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