द मीडिया टाइम्स डेस्क, 30 मई
Bihar news : आर्थिक अपराध इकाई की ताबड़तोड़ रेड में किशनगंज के तत्कालीन नगर थानेदार और वर्तमान में लाइन हाजिर अभिषेक कुमार रंजन की कथित अकूत दौलत का ऐसा जखीरा सामने आया कि जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच किशनगंज से ऐसा खुलासा हुआ है जिसने खाकी की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन हाथों में कानून की हिफाजत की जिम्मेदारी थी, उन्हीं पर काली कमाई का साम्राज्य खड़ा करने का इल्जाम लगा है। आर्थिक अपराध इकाई की ताबड़तोड़ रेड में किशनगंज के तत्कालीन नगर थानेदार और वर्तमान में लाइन हाजिर अभिषेक कुमार रंजन की कथित अकूत दौलत का ऐसा जखीरा सामने आया कि जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।मंगलवार की सुबह जब ईओयू की टीम ने पटना, किशनगंज और सारण में एक साथ दबिश दी तो किसी को अंदाजा नहीं था कि जांच का दायरा इतना बड़ा निकलकर सामने आएगा। रामकृष्णानगर स्थित आवास से लेकर किशनगंज के सरकारी आवास, सरकारी कार्यालय और सारण के पैतृक ठिकानों तक छापेमारी का जाल बिछाया गया। जैसे-जैसे दस्तावेज खंगाले गए, वैसे-वैसे कथित बेनामी संपत्तियों, निवेश और संदिग्ध लेन-देन की परतें खुलती चली गईं।2009 बैच के दरोगा रहे अभिषेक कुमार रंजन पर आय से 115.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। ईओयू की जांच के मुताबिक उनकी वैध आय वेतन, लोन और अन्य स्रोतों को मिलाकर करीब 1.47 करोड़ रुपये है, जबकि कथित तौर पर उनके पास इससे कहीं अधिक संपत्ति और निवेश के सुराग मिले हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ करीब 1.70 करोड़ रुपये का डिस्प्रोपोर्शनट एसेट (डीए) केस दर्ज किया गया है।कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जांच की सुई किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम तक भी पहुंच रही है। बताया जाता है कि दोनों के बीच बेहद करीबी संबंध थे। पुलिस महकमे में चर्चा है कि एक आईपीएस और निलंबित एसडीपीओ गौतम दोनों की सिफारिश पर ही अभिषेक की अहम थाने में पोस्टिंग हुई थी। सूत्रों का दावा है कि दोनों के बीच दिनभर में दर्जनों बार बातचीत होती थी। जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और निवेश के तार जोड़ने में जुटी हैं। यहीं नहीं इस मामले में कथित तौर पर एक आईपीएस का नाम भी सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार साहेब भी ईओयू के रडार पर हैं।
