द मीडिया टाइम्स डेस्क
पटना, 6 मई | बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार 7 मई को पटना के गांधी मैदान में आयोजित मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में मंत्री पद की शपथ लेंगे। जदयू नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक के बाद उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई है।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री आवास 7 सर्कुलर रोड पर देर शाम चली बैठक में जदयू कोटे से मंत्रियों के नामों पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और शीर्ष पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। सूत्रों का दावा है कि पहले निशांत कुमार सरकार में शामिल होने को लेकर तैयार नहीं थे और उन्होंने मंत्री बनने से इनकार कर दिया था। लेकिन पार्टी नेताओं के लगातार समझाने और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देने के बाद उन्होंने आखिरकार हामी भर दी।
निशांत कुमार के मंत्री बनने की चर्चाओं के बीच उनकी प्रस्तावित ‘सद्भावना यात्रा’ भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है। पहले यह यात्रा 7 मई से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे 9 मई से दोबारा शुरू किए जाने की तैयारी है। राजनीतिक जानकार इसे निशांत कुमार की औपचारिक राजनीतिक एंट्री के तौर पर देख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जदयू की ओर से संभावित मंत्रियों की सूची मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दी गई है। इस सूची में निशांत कुमार समेत कुल 12 नाम शामिल हैं। जिन नेताओं के शपथ लेने की चर्चा है उनमें निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, शीला मंडल, मदन सहनी, सुनील कुमार, रत्नेश सदा, जमा खान, बुलो मंडल, भगवान सिंह कुशवाहा और दामोदर रावत के नाम प्रमुख हैं। हालांकि अब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
पटना के गांधी मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े केंद्रीय नेताओं के शामिल होने की संभावना के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक विशेष सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि निशांत कुमार वास्तव में मंत्री पद की शपथ लेते हैं, तो यह जदयू और बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। अब तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार की एंट्री को आगामी चुनावों और जदयू के भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार की राजनीति में अब सभी की नजर 7 मई के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई है।
