गोसेखुर्द बांध का जलस्तर अचानक बढ़ाने से किसानों की फसल बर्बाद, प्रशासन की लापरवाही उजागर

संवाददाता धम्मपाल बौद्ध ,नागपूर / भंडारा

मौदा (नागपुर): मौदा तहसील अंतर्गत कोटगांव क्षेत्र में गोसेखुर्द बांध के बैकवॉटर क्षेत्र से जुड़े किसानों की समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। प्रशासन की कथित लापरवाही के चलते किसानों को बिना किसी पूर्व सूचना के गोसेखुर्द बांध का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया गया, जिससे खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो गईं।

कोटगांव निवासी किसान संजय रंगारी इतके ने बताया कि उनका खेत गोसेखुर्द बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में आता है। उन्होंने करीब तीन एकड़ भूमि में मेहनत से फसल उगाई थी। लेकिन प्रशासन द्वारा अचानक पानी छोड़े जाने के कारण खेतों में पानी भर गया और कुछ ही घंटों में पूरी फसल नष्ट हो गई। किसान का कहना है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो वे फसल को बचाने या कम से कम नुकसान कम करने के प्रयास कर सकते थे।

प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना हुई हो। इससे पहले भी कई बार बिना चेतावनी के जलस्तर बढ़ाए जाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बावजूद इसके, प्रशासन ने कोई स्थायी व्यवस्था या चेतावनी प्रणाली विकसित नहीं की है।

ग्रामीणों के अनुसार, गोसेखुर्द बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। अचानक पानी छोड़े जाने से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, ऐसे में फसल बर्बाद होना उनके लिए गंभीर संकट बन जाता है।

पीड़ित किसानों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले की तत्काल जांच कराए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है, उन्हें शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए। किसानों का यह भी कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जलस्तर बढ़ाने से पहले ग्राम स्तर पर सूचना देने की ठोस व्यवस्था की जाए।

इस संबंध में जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का पंचनामा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की जरूरत है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है और किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

 

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